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माँ (कविता)

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माँ, तुम मेरा सूरज हो ,तुमसे मेरा उजाला है ा‍ तुम मेरा चाँद हो ,तुमसे मेरी चमक है ा‍ इस दुनिया में माँ तुझसा कोई ना प्यारा है ा‍ मै तुझे कैसे बताऊ तू कितनी प्यारी है ा‍ भगवान तू मेरी , सबसे तू न्यारी है ा‍ ममता की तू मूरत है ा‍ तुझमे रब की सूरत है ा‍ मै जब भी गम में होती हूँ, तेरा चेहरा नज़र में आता है ा‍ माँ मेरी तुझसे ही तो... मुझमे बल आता है ा‍ जब मैंने पहली बार कलम उठाई थी, मेरी कलाई तो तूने ही पकड़ाई थी ा‍ वो चम्मच का से पहला निवाला जब से खाना शुरू किया है, हर बार बचपन वाला तेरा हाथ से खाना याद  आया है ा‍      हर पल मुझे बस तेरे पास रहना है, मेरी ज़िन्दगी तू है माँ तुझसे ही मेरा होना है ा‍